
✍🏻🍂.. माथे की लकीरें थक चुकी हैं, सिर्फ़ ये सोचते सोचते ~कि बेचारगी और बे बसी ने कितने ख्वाबों को मार दिया, ज़िंदगी पूरी होते होते ….🍂


मेरे मौला तेरी बनाई इस दुनियां में कोई भी भूखा ना सोए और उनके सदके तुफेर हमें भी रिज्क आता हों …….✍ sh shah

जिन्दगी कि कश्मकश मैं हम हर पहेलि मैं मगरुर रहते हैं, पर हमारी जिन्दगी मैं कुच्छ लम्हे ऐसे भी होते हैं, जिन्हे भुलाया नही जा सकता कुच्छ ऐसा ही पल हम महसूस कर रहे हैं,नयी जगह,नये दोस्त, जिन्दगी कि एक नयी कसौटी पर शुक्रिया आप सभी का मेरी जिन्दगी मैं ये खूबसूरत वक्त सामिल करने के लिए…..
Thanks Allot…KDMI Team



