✍🏻🍂.. माथे की लकीरें थक चुकी हैं, सिर्फ़ ये सोचते सोचते ~कि बेचारगी और बे बसी ने कितने ख्वाबों को मार दिया, ज़िंदगी पूरी होते होते ….🍂

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